Tuesday, May 09, 2006

मेरे वजूद का वाहेमा-- मुहम्मदअली भैडु”वफा”



मेरे वजूद का वाहेमा-- मुहम्मदअली भैडु”वफा”

कुछ भी नहीँ हम फीर भी हमारे होने का है वाहेमा,
वक़्त के सांचेमे एक दिन पीस जायेगी सब दास्ताँ.

तु कया तेरी नक़्सी हक़ीक़त का तिलस्म तूट्जायेगा,
राजदार था ये आयेना ,चुपभी रहेगा ये आयेना.

मुहम्मदअली भैडु”वफा”
.

1 Comments:

At 15 July, 2006, Anonymous Anonymous said...

ohNamaste sir ji.

i seen your blog Bazme wafa. it is really nice one. i enjoy gazals and sayaries.

कुछ भी नहीँ हम फीर भी हमारे होने का है वाहेमा,
वक़्त के सांचेमे एक दिन पीस जायेगी सब दास्ताँ.



thank you,

amit pisavadiya



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